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Thursday, July 29, 2010

कारोबार बन गया है मूर्ति और प्राचीन धरोहरों की चोरी

खबरों में इतिहास ( भाग-८)
अक्सर इतिहास से संबंधित छोटी-मोटी खबरें आप तक पहुंच नहीं पाती हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए इतिहास ब्लाग आपको उन खबरों को संकलित करके पेश करता है, जो इतिहास, पुरातत्व या मिथकीय इतिहास वगैरह से संबंधित होंगी। अगर आपके पास भी ऐसी कोई सामग्री है तो मुझे drmandhata@gmail पर हिंदी या अंग्रेजी में अपने परिचय व फोटो के साथ मेल करिए। इस अंक में पढ़िए--------।

१-मूर्ति और प्राचीन धरोहरों की चोरी
२-2700 साल पुराने कंकाल बरामद

कारोबार बन गया है मूर्ति और प्राचीन धरोहरों की चोरी

अपराध की दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा कारोबार संगठित रूप ले चुका है। ये कारोबार है मूर्ति और प्राचीन धरोहरों की चोरी। इसका सालाना टर्न ओवर दस हजार करोड़ रुपये है और इस कारोबार ने अपना नेटवर्क देश भर में फैला लिया है।
भगवान शिव की एक मूर्ति को हाल ही में दिल्ली पुलिस ने बरामद किया। 6 करोड़ रुपये की कीमत वाली ये मूर्ति दक्षिण भारत से चोरी की गई थी। दिल्ली में इसे बेचने के लिए लाया गया मगर तस्करों के हाथ पड़ने से पहले ये मूर्ति दिल्ली पुलिस के हाथ लग गई। ये और ऐसी 1200 प्राचीन धरोहरें देश के विभिन्न हिस्सों से एक साल में चोरी कर ली गईं। 2008 का ये आंकड़ा राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो का है। दुनिया के बाजार में इनकी कीमत कम से कम 500 करोड़ है।
वाराणसी सहित पूरे पूर्वांचल से पिछले एक साल में सौ करोड़ की मूर्तियां चोरी हो चुकी हैं। अकेले यूपी में पिछले दो सालों के दौरान नौ शहरों से 75 करोड़ की मूर्तियां बरामद की गईं और 50 लोग गिरफ्तार किए गए। मगर मूर्ति चोरी का ये रैकेट बदस्तूर जारी है। सिर्फ यूपी में ही नहीं हर उस राज्य से जहां प्राचीन धरोहर हैं सैकड़ों की संख्या में मूर्ति या धरोहरों की चोरी हो रही है। मूर्तियों के लिए मशहूर मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा चोरी हो रही है। दूसरे नंबर पर राजस्थान है।
मूर्ति चोरी के तेजी से बढ़ रहे आंकड़ों की दूसरी सबसे बड़ी वजह है सुरक्षा के नाकाफी इंतजाम। बिहार के 72 हैरिटेज स्थलों में से सिर्फ 3 नालंदा, बोधगया और सासाराम ही पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की तरफ से संरक्षित किए गए हैं। पूरे राजगीर इलाके में सिर्फ 12 सुरक्षाकर्मी हैं। पुरातत्व विभाग ने केंद्र सरकार से 500 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की मांग की है जो अभी लंबित है। हमारे देश में राष्ट्रीय महत्व की 3675 इमारतें दर्ज हैं। रामनिवास मिर्धा कमेटी ने 9000 प्राचीन इमारतों की देखभाल के लिए चौकीदार आदि की व्यवस्था का निर्देश दिया था जिसमें से बमुश्किल 4000 इमारतों पर ही यह व्यवस्था हो पाई है।
समस्या ये है कि सिर्फ चौकीदारों की तैनाती से मूर्तियों की सुरक्षा संभव नहीं क्योंकि निहत्थे चौकीदारों की हत्या कर मूर्ति चोरी के कई मामले हुए हैं। जिस तरीके से मूर्ति तस्करों का नेटवर्क मजबूत दर मजबूत होता जा रहा है उसके मुकाबले चौकीदार नाकाफी ही रहेंगे। (आईबीएन-7 )


मेक्सिको में 2700 साल पुराने कंकाल बरामद

मेक्सिको में पुरातत्वविदों ने लगभग 2,700 वर्ष पुराने मानव कंकाल बरामद करने का दावा किया है।
एक समाचार एजेंसी के अनुसार मेक्सिको के चियापास प्रांत के जोक्यी इलाके में पुरातत्वविदों ने एक गुंबद का पता लगाया, जिससे 2,700 वर्ष पुराने चार कंकाल बरामद किए गए। पुरात्व मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार जिस गुंबद का पता लगाया गया है वह मिजोअमेरिका युग का सबसे प्रचीन हो सकता है। इससे ओलमेक और माया संस्कृतियों के घटनाक्रम का पता लगाया जा सकता है। इस प्राचीन गुंबद का पता चियापा डी कोजरे पुरातत्व परियोजना से जुड़े सदस्यों ने नेशनल ऑटोनोमस यूनीवर्सिटी ऑफ मेक्सिको (यूएनएएम) और ब्रिगेम यंग यूनीवर्सिटी की सहायता से लगाया।

विशेषज्ञों के अनुसार गुंबद से बरामद चार कंकाल 700-500 ईसापूर्व के हैं हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। इसके लिए कार्बन 14 डेटिंग और हड्डियों की डीएनए जांच होगी, इसके बाद ही इन कंकालों की अवधि का पता चल पाएगा। एजेंसी के अनुसार गुंबद में अंतिम संस्कार करने के लिए एक कक्ष बना है जिसके साथ एक कमरा भी है। इसमें छह-सात मीटर लंबा पिरामिड और ऊपरी हिस्से में एक मंदिर भी है। एजेंसी के मुताबिक गुंबद के भीतर जो चार कंकाल बरामद किए गए, उसमें एक 50 वर्षीय व्यक्ति, एक वर्षीय लड़का, एक लड़की और एक महिला का कंकाल प्रतीत होता है। पुरातत्वविदों का कहना है कि जिस गुंबद का पता लगाया गया है वह 20वीं शताब्दी के मध्य में ला वंटा टाबेस्को से बरामद गुंबद की तरह प्रतीत होता है। प्राचीन काल में यह क्षेत्र ओलमेत संस्कृति का गढ़ माना जाता था।
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